कश्मीर समेत देश के सभी अलगाववादग्रस्त इलाकों के युवाओं को चुनना होगा कि उनका नायक कौन है ?आतंकवादी बुरहान वानी है या बीएसएफ कमांडेंट परीक्षा टापर नदीम अहमद वानी ?
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आज कश्मीर का युवा के हाथ में पत्थर है परंतु कश्मीर के ही युवा नदीम अहमद वानी ने पत्थर की जगह हाथ मे पेन पकङी।विपरीत माहौल मे पढाई लिखाई की और आज आसिस्टेट कमांडेट बनकर कश्मीर का नाम देश मे रोशन कर रहा है। उसने कहा भी है कि हमारी समस्या बेरोजगारी है।
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देश के युवाओं को, खासकर कश्मीरी नौजवानों को यह तय करना होगा कि वे हर हाल मे नदीम अहमद वानी की राह चुनें ।पेन पकङें।इसी मे उसका बेहतर भविष्य है न कि कुछ ललमुहो व कलमुहो के बहकावे मे आकर पत्थरबाजी करने की आजादी को जीवन का लक्ष्य बनाकर अपनी व देश की अवाम की जिंदगी बदतर बनाने की गलती और बदमाशी करने मे खुद को बर्बाद कर दे ।
Tuesday, 13 September 2016
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