Amit Kumar
Sunday, 15 March 2026
हिंदू धर्म और मुस्लिम देश
Monday, 24 September 2018
पाकिस्तान क्यों चाहता है राहुल गांधी को?
राफेल घोटाला हुआ नहीं, अभी तो कांग्रेस को ये नहीं पता कि पैसा कितना और गया कहा है? क्यों की राफेल का सायेद ये पता ही नहीं है कि उसमें सही सही पैसा कितना लगा है? क्यों की फ्रांस और भारत सरकार के भी समझौता ही यही है कि उसका दाम सार्वजनिक नहीं किया जायेगा।
अब बिना कुछ जाने झूठ का हला करने का क्या मतलब है, इसका सीधा मतलब तो यही है कि चुनाव नजदीक आने वाला है और किसी भी तरह से चर्चा में रहे ताकि चुनाव में फायदा मिले।
आखिर अयेसी क्या बात है कि राहुल गांधी को पाकिस्तान और पाकिस्तानी सरकार क्यों सपोर्ट कर रही है? इसका वहजह ये है कि पाकिस्तान जानता है कि मोदी के सामने पाकिस्तान का कुछ भी नहीं चलने वाला है, और मोदी ही उसको पूरी दुनिया में अलग थलग किया है, और पाकिस्तान जानता है कि कांग्रेस ये नहीं करेगा और इस से पाकिस्तान को फायदा होगा इसलिए पाकिस्तान चाहता है कि राहुल गांधी भारत का प्रधान मंत्री बने।
लेकिन देश का नागरिक जानती हैं कौन कितना पानी में है। आखिर क्यू दे हम कांग्रेस को वोट? आज तक कि ही क्या हमारे लिए?ये सरकार 35 हवाई अड्डा बनवाए 5 साल में लेकिन कांग्रेस ने क्या किया???? वोट बर्बाद नहीं करे और सही चुने......
Saturday, 1 July 2017
Why China is stare to India?
China is a developing country but the main thing is that china mostly supply its goods to other country but less import from other country. In India most of the people purchase the chinese product due to this China earn more money and from this money China increases his defense strength and dare to stare his eye to India.
In India the current situation is people have craze to purchase the Redmi phone, and even lots of people are purchase also by this china increases its budget.
Indirectly, china earn money from india and use this money for killing the indian soldier and indian people.
So, why people are purchase the chinese product? Is Indian people are foolish? If every people are boycott the chinese product then china have not to dare to stare to India as like as Sikkim. In recent situation china always try to conquer the Indian territory and all these thing are happened due to the lost of purchasing of chinese product.
So, at last I conclude this If we and each every people want to safe in future then the people have avoid to purchase the chinese product.
MORE AVOID CHINESE PRODUCT MORE CHANCE TO SAFE.
THANK YOU
Tuesday, 15 November 2016
दिल के रोग और उनका इलाज – Disease of Heart
हृदय को रक्त पहुंचाने वाली धमनियों का संकरा और सख्त हो जाना ही हृदय रोग का कारण होता है। हृदय की मांसपेशियों को अपना कार्य करने के लिए शुद्ध रक्त की लगातार जरूरत होती है जिसकी आपूर्ति इन धमनियों के द्वारा ही होती है। धमनियों में संकीर्णता या आंशिक अवरोध उत्पन्न हो जाता है। (खासकर रक्त की धमनियों के भीतर चिकनाई की परत-दर-परत जमते जाने और धमनी का भीतरी व्यास के कम हो जाने के कारण उत्पन्न हो जाता है।)
लक्षण :
दिल में तेज दर्द होने पर बेचैनी हो जाती है। हृदय में दर्द अचानक उठता हैं और बाएं कंधे तथा बाएं हाथ तक फैल जाता है। सांस फूलना, घबराहट बढ़ जाना, ठंडा पसीना आना तथा बेहोश हो जाना, जी मिचलाना, हाथ-पैर ठंडे पड़ना तथा नब्ज कमजोर मालूम पड़ना इस रोग के अन्य लक्षण हैं।
हृदय रोग को पांच वर्गों में बांटा गया है,
1. वातज,
2. पैत्तिक,
3. कफज,
4. सिन्नपातिक
5. कृमिक।
वातज हृदय रोग :
लक्षण :
हृदय में तेज दर्द, हृदय का रुकना, तीव्रनाड़ी, बेहोशी आदि।
पैत्तिक हृदय रोग :
लक्षण :
हृदय में भारीपन व थकान और प्यास, जलन, मुंह में सूखापन व बेहोशी आना, पैत्तिक हृदय रोग के मुख्य लक्षण हैं।
कफज हृदय रोग :
लक्षण :
हृदय की गति में जैसे रुकावट आ गई हो, शरीर में भारीपन, कफ का अधिक निष्कासन, भूख न लगना, मुंह में मधुर स्वाद और कफज हृदय रोग के लक्षण हैं।
सन्निपातिक हृदय रोग:
लक्षण:
वातज, पैत्तिक व कफज हृदय रोग में विर्णत समस्त लक्षण सिन्नपातिक हृदय रोग में पाये जाते हैं।
कृमिक हृदय रोग:
लक्षण:
हृदय में तेज दर्द व खुजली होना कृमिक हृदय रोग के मुख्य लक्षण हैं। अन्य लक्षणों में जी मिचलाना, हृदय के कार्य में शिथिलता, सिर दर्द, भूख का न लगना व सूजन उत्पन्न होना आदि हैं।
भोजन और परहेज:
अत्यधिक गर्म एवं ठंडे दोनों खाद्य-पदार्थों से बचें।
अधिक परिश्रम, सहवास, घी, मलाई, मक्खन आदि हानिकारक है।
तम्बाकू, जर्दा, चाय, कॉफी, शराब एवं अन्य नशीली चीजें तथा मांस-मछली, गर्म मसाला आदि का सेवन करना मना है।
हृदय-रोग में शीर्षासन कभी न करें।
विभिन्न औषधियों से उपचार-
1. मुलहठी (मुलेठी):
ज्यादातर शिराओं और धमनियों पर गलत खान-पान, गलत आदतें, काम का अधिक भार पड़ने से कमजोरी और निर्बलता आ जाती है, इससे हृदय को हानि पहुंचती है। इस कारण अनिद्रा (नींद का न आना), हाई और लो ब्लडप्रेशर जैसे रोग हो जाते हैं। ऐसे में मुलहठी काफी लाभदायक होता हैं।
मुलेठी और कुटकी का चूर्ण जल के साथ सेवन करने से हृदय के रोग में लाभ होता है।
दिल (हृदय) में थोड़ा-सा दर्द मालूम होते ही मुलेठी और कुटकी का चूर्ण समान भाग में लेकर लगभग आधा चुटकी चूर्ण गुनगुने पानी के साथ सेवन करने से लाभ होता है।
2. लौकी:
लौकी के रस में, 5 पुदीने की पत्तियां और तुलसी की 10 पत्तियों का रस निकाल लें और इस रस को सुबह, दोपहर और रात को भोजन के आधा घंटा बाद लेना चाहिए। पहले 3-4 दिन रस की मात्रा कुछ कम ली जा सकती है। बाद में ठीक से हजम होने पर रोजाना रस की मात्रा 3 बार पूरा 250 मिलीलीटर रस हर बार लें। रस हर बार ताजा लेना चाहिए।
लौकी का रस पेट में जो भी पाचन विकार होते है, उन्हें दूर करके मल के द्वारा बाहर निकाल देता है, जिसके कारण शुरुआत में पेट में कुछ खलबली, गड़गड़ाहट आदि महसूस होती है, जो कि एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया है। इससे घबराना नहीं चाहिए। 3-4 दिन में पेट के विकार दूर होकर सामान्य स्थिति हो जाती है। इसे नियमित 2-3 महीने आवश्यकतानुसार लेने से हृदय रोगी ठीक होने लगता है। और बाईपास सर्जरी कराने की जरूरत नहीं पड़ती।
3. गुलकन्द: गुलकन्द या गुलाब के सूखे फूलों में चीनी मिलाकर खाने से हृदय को बल मिलता है।
4. गुलाबजल: गुलाब जल में थोड़े-से गुलाब के फूल और 100 ग्राम हरा धनिया पीसकर चटनी के रूप में सेवन करने से दिल के रोग में लाभ होता हैं।
5. अजवायन: यदि दिल की कमजोरी के कारण छाती में दर्द होता हो, तो 1 चम्मच अजवाइन को 2 कप पानी में उबालें। आधा कप पानी बचा रहने पर काढ़े को छानकर रात के समय इस काढ़े को रोजाना 40 दिनों तक सेवन करें और ऊपर से आंवले का मुरब्बा खाएं। यह हृदय रोग को दूर करने में लाभकारी है।
6. करौंदा: करौंदा हृदय रोग को दूर करने में बहुत उपयोगी है। करौंदे की सब्जी मीठा डालकर या मुरब्बा खाना बहुत लाभदायक है।
7. गाय का दूध : हृदय रोगी को गाय का दूध व घी फायदेमंद हैं भोजन में इसका प्रयोग रोजाना सेवन करना भी लाभकारी होता हैं।
8. लहसुन :
यदि यह शंका हो कि अमुक समय हृदय में दर्द शुरू हो सकता है, तो लहसुन की 4 कलियां चबाकर खा जायें।
हृदय की गति रुकने की संभावना होते ही 3-4 लहसुन की कलियों को तुरंत चबा लेने से हार्टफेल नहीं होता। इसके पश्चात् इसे दूध में उबालकर देने से काफी लाभ होता है और लहसुन को पीसकर दूध में पीने से ब्लडप्रेशर में भी लाभ होता है। लहसुन हृदय रोगी के लिए अति उत्तम प्रकृति प्रदत्त औषधि है।
9. पालक रस: चौलाई का रस आधा चम्मच, पालक का रस 1 चम्मच और नींबू का रस 1 चम्मच। तीनों को मिलाकर रोजाना सुबह 20 दिनों तक सेवन करने से हृदय रोग में लाभ होगा।
10. लीची का रस: गर्मी के मौसम में आधा कप लीची का रस रोज पीने से हृदय को काफी बल मिलता है।
11. खूबानी का रस: खूबानी का रस 4 चम्मच पानी में डालकर रोजाना रोगी को पिलायें।
12. इमली: पकी हुई इमली का घोल 2 चम्मच और थोड़ी-सी मिश्री, दोनों को मिलाकर सेवन करने दिल की बीमारी में आराम मिलता है।
13. कपास: एक कप पानी में कपास के 4 फल भिगो दें। 4-5 घंटे बाद इसे उसी पानी में मथ लें। इसमें थोड़ी-सी मिश्री डालकर रोगी को सेवन कराने से लाभ होता है।
14. काले चने: हृदय के रोगियों को काले चने उबालकर उसमें सेंधानमक डालकर खाने से दिल के रोग में लाभ होता है।
15. बथुआ: बथुए की लाल पत्तियों को छांटकर उनका रस लगभग आधा कप निकाल लें। उसमें सेंधा नमक डालकर सेवन करें।
16. बरगद का दूध: बरगद के दूध की 4-5 बूंदे बताशे में डालकर लगभग 40 दिनों तक सेवन करने से हृदय के रोग में लाभ मिलता है।
17. जावित्री: जावित्री 10 ग्राम, दालचीनी 10 ग्राम और अकरकरा 10 ग्राम। तीनों को मिलाकर आधा चम्मच चूर्ण प्रतिदिन शहद के साथ सेवन करने से हृदय रोग में लाभ होता है।
18. नीम की जड़: बड़े नीम की जड़ 10 ग्राम, कूट 10 ग्राम, सोंठ 10 ग्राम तथा कचूर 10 ग्राम को कूट-पीसकर चूर्ण बना लें। इसमें से 4 ग्राम चूर्ण देशी घी में मिलाकर सेवन करने से लाभ होता है।
19. बिजौरा: पोहकर मूल, बिजौरा, नींबू की जड़, सौंठ, कचूर, तथा हरड़। इन सबको बराबर की मात्रा में लेकर कूट-पीसकर लुगदी बना लें। इसमें से छोटे बेर के समान लुगदी लेकर सेंधानमक के साथ सेवन करने से दिल की बीमारी में आराम मिलता है।
20. मुनक्का: 5 ग्राम मुनक्का, 2 चम्मच शहद और एक छोटी डली मिश्री तीनों को पीसकर चटनी बना लें। यह चटनी सुबह के समय नाश्ते के बाद सेवन करने आराम मिलता है।
21. पीपला मूल: पीपला मूल और छोटी इलायची का चूर्ण आधा चम्मच की मात्रा में देशी घी के साथ चाटने से हृदय रोग का शमन हो जाता है।
22. हींग: हींग, बच, सोंठ, जीरा, कूट, हरड़ चीता, जवाखार, संचर नमक और पोहकर मूल। इन सबको बराबर की मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। इसमें से आधा चम्मच चूर्ण शहद या देशी घी के साथ सेवन करें। इससे दिल की बीमारी में आराम मिलता है।
23. अरबी: हृदय के रोगी को अरबी की सब्जी 25 ग्राम दिन में एक बार रोजाना खाते रहने से हृदय रोग में लाभ होता है।
24. चौलाई: चौलाई की हरी सब्जी का रस पीने से हाई ब्लडप्रेशर में लाभ होता है।
25. कुलथी: कुलथी भिगोये गये पानी को छानकर सुबह-शाम पीने से हाई ब्लडप्रेशर (उच्च रक्तचाप) में लाभ होगा।
26. आलू का रस:
आलू के रस को शहद यानी हन्नी के साथ पीने से हृदय की जलन मिटती है।
यदि रस निकाला जाना कठिन हो तो कच्चे आलू को मुंह से चबाएं तथा रस पी जाएं और गूदे को थूक दें। आलू का रस पीने से हृदय की जलन दूर होकर तुरंत ठण्डक प्रतीत होती है।
27. मौसमी:
मौसमी शक्तिवर्द्धक और हृदय रोगनाशक है। इसका रस नियमित सेवन करने से रक्त में एकत्रित कोलैस्ट्राल नामक दूषित पदार्थ जो हार्टफेल में सहायक होता है, निकल जाता है और रक्त तथा हृदय संस्थान काफी शक्तिशाली हो जाता है।
मौसमी के निरन्तर प्रयोग से खून वाहिनियां कोमल और लचकीली हो जाती हैं। उनमें कोलैस्ट्राल (विषैला पदार्थ जो हृदय को फेल करने में सहायक है) शरीर से निकल जाता है और शरीर में ताजा खून, विटामिन और आवश्यक खनिज लवण पहुंचा देता है। हृदय और खून-संस्थान, खून वाहिनियों और कैपलरीज को शक्तिशाली बनाने में मौसमी का इस्तेमाल किया जाता है।
आधा कप मौसमी का रस सुबह के नाश्ते के बाद रोज सेवन करें। यह हृदय के रोग में लाभदायक है।
28. सेब: दिल की कमजोरी दूर करने के लिए सेब खाना लाभदायक है।
29. खजूर: खजूर खाने से दमा और सूखी खांसी दूर होती है। इससे शरीर ताकतवर बनता है और हृदय में भी ताकत आती है।
30. गेहूं: गेहूं के नवजात पौधे का रस अल्प मात्रा में नियमित पीने से दमा, खांसी और छाती के कैन्सर तक दूर होते हैं।
31. शलगम: शलगम, बंदगोभी, गाजर और सेम का रस मिलाकर सुबह-शाम 2 सप्ताह तक पीने से हृदय के रोग में लाभ होता है।
32. शहद: हृदय की घबराहट, दुर्बलता आदि जब मालूम हो 1 कप गर्म पानी में 2 चम्मच शहद घोलकर रोजाना 2-3 बार सेवन करने से इन रोगों में लाभ होगा।
33. सौंठ :
सौंठ का काढ़ा बनाकर सेंधानमक के साथ पीने से लाभ होता है। हृदय की दुर्बलता एवं धड़कन में लाभ करता है।
यदि दिल कमजोर हो, धड़कन तेज या बहुत कम हो जाती हो, दिल बैठने लगता हो, तो एक चम्मच सोंठ को एक कप पानी में उबालकर उसका काढ़ा बनाकर रोज इस्तेमाल करने से लाभ होता हैं।
34. रूद्राक्ष: हरे एवं ताजे रुद्राक्ष के फलों को लेकर इसका छिलका निकालकर, काढ़ा बना लें। इसे थोड़ी-सी मात्रा में कुछ महीने तक सेवन करने से हृदय के समस्त रोगों में लाभ होता है।
35. मेथीदाना: सूखे मेथी दाने का प्रयोग हाई ब्लडप्रेशर (उच्च रक्तचाप) में लाभकारी होता है। यह कालेस्ट्राल का स्तर रक्त में घटाता है। जिसके फलस्वरूप उच्च रक्तचाप के रोग से मुक्ति मिलती है।
36. अदरक :
अदरक का रस और पानी बराबर मात्रा में मिलाकर सेवन करने से हृदय रोग मिटता है।
आधा-आधा चम्मच अदरक और शहद को धीरे-धीरे रोगी अपनी अंगुली की सहायता से चाटे तो लाभ होगा।
37. हरीतकी:
हरीतकी फल मज्जा और वचा प्रकन्द समान मात्रा में मिलाकर 1 ग्राम चूर्ण को 4 से 6 ग्राम शहद के साथ दिन में 2 बार सुबह-शाम सेवन करने से दिल के रोग में आराम मिलता है।
हरीतकी फल मज्जा, वचा प्रकन्द, रास्ना मूल, शटी, पुष्करमूल, पिप्पलीफल व शुंठी समभाग मिलाकर 3 से 6 ग्राम चूर्ण, 100 से 250 मिलीलीटर दूध के साथ दिन में 2 बार सेवन करने से लाभ होगा।
हरीतकी फल मज्जा, त्रिवृत्, शटी, बला, पुष्कर मूल व शुंठी एक समान मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को 2 से 4 ग्राम की मात्रा में 7 से 14 मिलीलीटर गौमूत्र या 50 मिलीलीटर गर्म पानी के साथ दिन में दो बार लेना चाहिए।
38. पिप्पली:
पिप्पली फल, एला बीज, वचा, घी में भुना हुआ हींग, यवक्षार, सेंधानमक, संचर नमक, शुंठी एवं अजमोद फल को एक समान मात्रा में लेकर बारीक चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को एक से 3 ग्राम की मात्रा में लेकर दाड़िम या बिजौरा या नारंगी के रस या उपयुक्त शहद के साथ दिन में दो बार सेवन करें।
15 मिलीलीटर से 30 मिलीलीटर शुंठी का काढ़ा 5 ग्राम शहद के साथ दिन में दो बार सेवन करना चाहिए।
6 से 12 मिलीलीटर तिल का तेल और एक ग्राम नमक को 15 से 30 मिलीलिटर दशमूल के काढे़ के साथ सुबह-शाम सेवन करना हृदय रोग में लाभकारी होता है।
39. अर्जुन:
अर्जुन की छाल 10 ग्राम, गुड़ 10 ग्राम और मुलेठी 10 ग्राम तीनों को एक साथ, लगभग 250 मिलीलीटर दूध में उबालकर दिल के रोगी को सेवन कराने से लाभ होता है।
अर्जुन की छाल का काढ़ा बनाकर पीने से हृदय की धड़कन, हार्टफेल और घबराहट आदि विभिन्न हृदय रोगों में लाभ मिलता है।
अर्जुन की छाल और गुड़ को दूध में औटाकर पिलाना चाहिए।
3 से 6 ग्राम अर्जुन की छाल का चूर्ण व 3 से 6 ग्राम गुड़, 50 मिलीलीटर पानी के साथ दिन में 2 बार सेवन करने से हृदय की बीमारी में लाभ होता है।
10 ग्राम अर्जुन छाल, 40 मिलीलीटर दूध व 160 मिलीलीटर पानी मिलाकर तब तक उबालें जब तक वह चौथाई न रह जाये। इस दूध की 100 से 250 मिलीलीटर मात्रा 5 से 10 ग्राम शर्करा के साथ दिन में 2 बार लेने से हृदय के रोग में लाभ होगा।
अर्जुन की मोटी छाल का महीन चूर्ण एक चम्मच की मात्रा में मलाई निकाले एक कप दूध के साथ सुबह-शाम नियमित सेवन करते रहने से हृदय के समस्त रोगों में लाभ मिलता है, हृदय को बल मिलता है और कमजोरी दूर होती है। हृदय की बढ़ी हुई धड़कन सामान्य होती है।
हृदय की सामान्य धड़कन जब 72 से बढ़कर 150 से ऊपर रहने लगे, तो एक गिलास टमाटर के रस में एक चम्मच अर्जुन की छाल का चूर्ण मिलाकर सेवन करने से शीघ्र ही धड़कन सामान्य हो जाती है। आवश्यक होने पर यही प्रयोग बार-बार दोहराया जा सकता है।
हृदयाघात, हृदयशूल में अर्जुन की 3 से 6 ग्राम छाल दूध में उबालकर लें।
अर्जुन की छाल के सेवन से हृदय को आवश्यक रक्त पहुंचता है, हृदय के संकोचन, विकास और आराम की क्रियाओं में वृद्धि होती है, हृदय को बल मिलता है। इसके सेवन से सारे शरीर में रक्त का संचरण ठीक होता है। यह शरीर में व्याप्त विषों को मूत्र की मात्रा बढ़ाकर बाहर निकाल देता है। अर्जुन के सेवन से रक्त-वाहिनियां और सूक्ष्म कोशिकाओं का आकुंचन होकर रक्त का दबाव बढ़ता है, पोषण होता है, धड़कन सुचारू रूप से कार्य करती है। बढ़ी हुई धड़कन की संख्या कम होती है। एक चम्मच अर्जुन की छाल का दो कप पानी और इतना ही दूध में काढ़ा बनाकर पीने से हृदय रोगों में लाभ होता है। इसी काढ़े से स्वप्नदोष एवं ज्वर के पश्चात् होने वाली कमजोरी में लाभ होता है। हृदय की मांसपेशियों को बल मिलता है।
40. एला बीज: एला बीज एवं पिप्पली मूल समभाग में लेकर 3 से 6 ग्राम की मात्रा में 5 ग्राम घी या 5 ग्राम शहद के साथ दिन में दो बार सेवन करना चाहिए।
41. दालचीनी :
एरण्ड तेल में भुनी हुई हरीतकी फल मज्जा 20 ग्राम, सेंधानमक 10 ग्राम, सफेद जीरा 10 ग्राम, मिलाकर 2 से 6 ग्राम की मात्रा, 5 से 10 ग्राम शर्करा के साथ दिन में 2 बार सेवन करने से दिल की बीमारी में आराम मिलता है।
50 ग्राम हरीतकी फल मज्जा, 100 ग्राम काला नमक, 500 ग्राम घी, 2 लीटर पानी में तब तक मंद आंच पर उबालें जब तक 500 मिलीलीटर शेष न रह जाये। इसे 12 से 24 मिलीलीटर की मात्रा में 50 ग्राम शर्करा के साथ दिन में दो बार सेवन करना चाहिए।
42. दही:
उच्च रक्तदाब, मोटापा और गुर्दे की बीमारियों में भी दही खाने से बहुत लाभ होता है।
दही हृदय रोग (दिल का रोग) की रोकथाम के लिए बहुत अच्छा है। दही खून में बनने वाले कोलेस्ट्राल नामक घातक पदार्थ को मिटाने की ताकत रखता है। कोलेस्ट्राल नामक सख्त पदार्थ रक्त शिराओं में जमकर रक्त प्रवाह (खून को चलने) से रोकता है और उससे ओटोर ओस क्लीरोसिस नामक हृदय रोग (दिल का रोग) होता है। चिकने पदार्थ खाने वाले इसी के शिकार हो जाते हैं। अत: दही का प्रयोग बहुत ही उत्तम होता है।
43. राई: हृदय के ढीलेपन में हृदय में कम्पन या वेदना हो, बेचैनी हो, कमजोरी महसूस होती है, तब हाथ-पैरों पर राई के चूर्ण की मालिश करने से रोगी को लाभ होता है।
44. दालचीनी: शहद और दालचीनी समान मात्रा में लेकर 1 चम्मच को नाश्ते में ब्रेड या रोटी से लगाकर प्रतिदिन खाएं। इससे धमनियों का कोलेस्ट्राल कम हो जाता है जिसको एक बार हार्ट अटैक आ चुका है, उनको दुबारा हार्ट अटैक नहीं आता है।
45. धनिया :
जिगर में कभी-कभी ठण्डी और कभी गर्म चीजें खाने के कारण हल्की गर्मी का प्रकोप हो जाता है। इसमें रोगी को विशेष कष्ट तो नहीं होता परन्तु खून में खराबी उत्पन्न हो जाने के कारण रोगी का शरीर निस्तेज होता है। ध्यान रहे कि ऐसी दशा में रोगी को हल्की और पाचक वस्तुओं का सेवन करना चाहिए। इसके लिए मसालेदान की औषधि भी हमारी सहायता कर सकती है। थोड़ा सा सूखा धनिया लेकर भूनकर फिर उसे चूर्ण के रूप में तैयार कर लें। इस चूर्ण को शहद के साथ सेवन करने से जिगर की गर्मी दूर हो जाती है।
धनिया, सौंफ, छोटी इलायची के दाने तथा तबाशीर समान मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। इसे 3-3 ग्राम की मात्रा में दिन में 2 बार खाना खाने के बाद लें।
धनिया 6 ग्राम और 10 ग्राम किशमिश को रात को पानी में गलने के लिए डाल दें। इसे पीस-छानकर सुबह खुराक के रूप में पीने से दिल की धड़कन में काफी लाभ होगा।
46. मौलसिरी: मौलसिरी के फूलों को रात भर आधा किलो पानी में भिगोकर रखें, प्रात:काल 10-20 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम 3-6 दिनों तक उस पानी को बच्चे को पिलाने से खांसी मिट जाती है।
47. एल्फाल्फा: एल्फाल्फा में कीटाणुनाशक गुण होते हैं। यह प्राकृतिक क्लोरोफिल होता है। यह हृदय रोगियों के लिए लाभदायक होती है।
48. आंवला :
पिसा हुआ आंवला गाय के दूध के साथ पीने से हृदय के सारे रोग दूर हो जाते हैं।
सूखा आंवला और मिश्री समान भाग पीस लें। इसकी एक चाय की चम्मच की फंकी रोजाना पानी के साथ लेने से हृदय के सारे रोग दूर हो जाते हैं।
आंवले का मुरब्बा दूध से लेने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है व किसी भी प्रकार के हृदय-विकार नहीं होते हैं।
हृदय में दर्द शुरू होने पर आंवले के मुरब्बे में 3-4 अमृतधारा की बूंदे डालकर सेवन करें।
भोजन करने के बाद हरे आंवले का 25-30 मिलीलीटर रस ताजे पानी के साथ रोगी को पिलायें।
एक चम्मच सूखे आंवले का चूर्ण फांककर ऊपर से लगभग 250 मिलीलीटर दूध पी लें।
आंवले में विटामिन-सी अधिक है। इसके मुरब्बे में अण्डे से भी अधिक शक्ति है। यह अत्यधिक शक्ति एवं सौन्दर्यवर्द्धक है। आंवले के नियमित सेवन से हृदय की धड़कन, नींद का आना रक्तचाप आदि रोग ठीक हो जाते हैं। रोज एक मुरब्बा गाय के दूध के साथ लेने से हृदय रोग दूर रहता है। हरे आंवलों का रस शहद के साथ, आंवलों की चटनी और सूखे आंवला की फंकी तालमिश्री के साथ लेना समस्त हृदय रोग में लाभकारी है।
49. फालसा:
पके फालसे का रस पानी, सौंफ और चीनी मिलाकर सेवन करने से हृदय रोग और पित्त विकार में लाभ मिलता है।
पके हुए फालसे का रस पानी, सौंठ और शक्कर को मिलाकर पीने से दिल की बीमारी और पित्त विकार रोग मे लाभ मिलता है।
50. गाजर:
हृदय (दिल) की धड़कन बढ़ना और रक्त गाढ़ा होने की बीमारी में गाजर लाभ करती है। हृदय (दिल) कमजोर होने पर रोजाना 2 बार गाजर का रस पीने से लाभ होता है।
एक कप गाजर का रस 40 दिनों तक रोगी को पिलाने से हृदय रोग में लाभ मिलता है।
51. गेहूं: इसके सेवन से ब्लडप्रेशर, हृदय रोग, लकवा और पोलियों की सम्भावना नहीं रहती है।
52. संतराहृदय (दिल), टी.बी., सांस और छाती के हर रोगों में नारंगी लाभदायक होता है।
53. कमल: कमल की जड़ का चूर्ण 1 चम्मच की मात्रा में 1 चम्मच मिश्री के साथ नियमित रूप से सेवन करने से हृदय और मस्तिष्क की शक्ति बढ़ती है।
54. पान:
हृदय की अनियमित गति, उच्च रक्तचाप (हाई ब्लडप्रेशर) के रोग में 1 चम्मच पान का रस में 1 चम्मच मिश्री मिलाकर सेवन करने से हृदय की गति नियन्त्रित होकर, रक्तचाप कम हो जाता है।
हृदय की कमजोरी तथा हृदय के रोग की हालत में पान का प्रयोग लाभदायक है। होम्योपैथिक औषधि डिजिटैलिस के स्थान पर इसका प्रयोग कर सकते हैं।
पान का शर्बत पीने से हृदय का बल बढ़ता है, कफ और मंदाग्नि (भूख कम लगने का रोग) मिटता है।
55. सफेद पेठा: हृदय (दिल) के रोगी को बाईपास सर्जरी कराने से पहले 1 बार पेठा जरूर खाना चाहिए। पेठा एंजाइना का दर्द तुरंत दूर करता है, रुकी हुई धमानियों को खोलता है। हृदय (दिल) के रोगों में पेठे का रस रोजाना 3 बार पीने से लाभ होता है।
56. अजवाइन: दिल के दर्द में अजवाइन देने से रोगी का दर्द बंद होकर हृदय उत्तेजित होता है।
57. अकरकरा: अर्जुन की छाल और अकरकरा की जड़ का चूर्ण बराबर मिलाकर पीस लें। दिन में दो बार आधा चम्मच की मात्रा में नियमित रूप से सेवन करने से घबराहट, हृदय की धड़कन, पीड़ा, कम्पन और दुर्बलता में लाभ होता है।
58. अकरकरा :
अर्जुन की छाल और अकरकरा का चूर्ण दोनों को बराबर मिलाकर पीसकर दिन में 2 बार आधा-आधा चम्मच की मात्रा में खाने से घबराहट, हृदय की धड़कन, पीड़ा, कम्पन और कमजोरी में लाभ होता है।
कुलंजन, सौंठ और अकरकरा की लगभग 1 ग्राम के चौथे भाग की मात्रा को 400 मिलीलीटर पानी में उबालकर चतुर्थाश काढ़ा पिलाने से हृदय रोग मिटता है।
59. गूलर: रोजाना पके हुए गूलर को खाकर उसके ऊपर से गर्म दूध पीने से हृदय रोग में लाभ मिलता है। गूलर लगातार खाते रहने से रक्तवाहनियों में लचक और कोमलता आती है।
60. सरसों का तेल: सरसों के तेल में खाना पकाने से तेल में उपस्थित एसिड `कोलेस्ट्रोल´ में परिवर्तन हो जाता है, जिससे दिल का रोग होता है।
61. प्याज:
कच्चा प्याज रोजाना खाना खाने से दिल की धड़कन सामान्य हो जाती है और दिल को ताकत मिलती है।
शहद में प्याज का रस समान मात्रा में मिलाकर 2 चम्मच रोजाना सेवन करने से रक्त में कोलेस्ट्राल की मात्रा कम हो जाती है तथा स्नायु दुर्बलता, अनिद्रा और हृदय की धड़कन में लाभ पहुंचाती है।
62. अलसी: अलसी के फूलों को छाया में सुखाकर उनका चूर्ण बना लें। इस चूर्ण में से 1 चम्मच चूर्ण को शहद के साथ दिन में 3 बार नियमित रूप से कुछ दिनों तक सेवन करने से हृदय को बल मिलता है।
63. केला:
2 केले 15 ग्राम शहद के साथ मिलाकर खाने से हृदय के दर्द में लाभ होता है।
पके केला में शहद मिलाकर सेवन करने से हृदय-पीड़ा दूर होता है।
64. पुनर्नवा:
पुनर्नवा की जड़ का चूर्ण और सूखे पत्तों के चूर्ण को बराबर मात्रा में मिलाकर 1 चम्मच की खुराक के रूप में सुबह-शाम शहद के साथ रोजाना सेवन करने से दिल के अनेक रोगों में लाभ होता है।
पुनर्नवा के जड़ के चूर्ण के सेवन से हृदय के रोग से पैदा हुए अस्थमा में काफी लाभ होता है।
65. खस (पोस्तदाना): पिप्पली का चूर्ण और खस की जड़ का चूर्ण बराबर मिलाकर 1 चम्मच की मात्रा में शहद के साथ लेने से दिल के दर्द में लाभ मिलता है।
66. नींबू:
नींबू के रस को ठंडे पानी में मिलाकर पीने से दिल का घबराना और छाती में जलन आदि की शिकायत दूर होती है।
हाई ब्लडप्रेशर में 1 चम्मच नींबू के रस में 2 चम्मच शहद मिलाकर पिलायें।
67. अमरूद:
अमरूद के फलों के बीजों को निकालकर बारीक-बारीक पीसकर शक्कर के साथ धीमी आंच पर बनाई हुई चटनी हृदय के लिए अत्यंत हितकारी होती है तथा कब्ज दूर करती है।
अमरूद को कुचलकर उसका आधा कप रस निकाल लें। उसमें थोड़ा-सा नींबू का रस डालकर पी जाएं।
इसमें विटामिन-सी है। यह हृदय में नई शक्ति देकर शरीर में स्फूर्ति पैदा करता है। ध्यान रहे कि इसे दमा व खांसी वाले रोगी को न खिलायें।
68. अनान्नास:
पके फलों के टुकड़े करके 1 दिन चूने के पानी में रखकर, सुखाकर, शक्कर की चासनी में डालकर मुरब्बा बना लें। यह पित्त का शमन और चित्त को प्रसन्न करता है।
अनान्नास का शर्बत (रस 10 मिलीलीटर, चाशनी 20 मिलीलीटर) भी पित्त को शांत करने वाला और हृदय को बल देने वाला है।
एक कप अनन्नास का रस रोजाना पी लें।
69. अनार:
अनार के ताजे पत्तों के 10 मिलीलीटर रस को 100 मिलीलीटर पानी में मिलाकर सुबह-शाम पीने से हृदय की तेज धड़कन में बहुत लाभ होता है।
अनार का रस उच्च रक्तचाप कम करता है। यह धमनियों के सिकुड़ने को कम करता है और खराब कोलेस्ट्रॉल के कॉक्सीडेशन को भी कम करता है। रोज अनार का रस पीने से बाईपास सर्जरी से भी बचा जा सकता है।
अनार का शर्बत 20-25 मिलीलीटर का नित्य सेवन करें। इससे हृदय के रोग नष्ट हो जाते हैं।
छाया में सुखाये हुए अनार के महीन पत्तों के चूर्ण को ताजे पानी के साथ सेवन करने से हृदय के रोग तथा दाद, चंबल (सोरायसिस) जैसे रक्तविकार, कुष्ठ, प्रमेह, दिल की धड़कन, नासूर, क्षत, पित्तज्वर, वातकफज्वर में गर्म पानी के साथ लेने से लाभ होता है।
चीनी के शर्बत में अनारदाने का रस मिलाकर सेवन करें। यह शर्बत हृदय की जलन, आमाशय की जलन, घबराहट और मूर्च्छा आदि को दूर करता है।
70. परवल:
परवल पाचक, हृदय के लिए हितकारी, वीर्यवर्धक (धातु को बढ़ाने वाला), हल्के, अग्निप्रदीपक (भूख को बढ़ाने वाला), चिकना और गर्म है। यह खांसी, रक्तविकार (खून के रोग), बुखार, कृमि (कीड़े) और त्रिदोष (वात, पित्त और कफ) नाशक है।
परवल के पत्ते, इलायची के दाने और पीपलामूल। तीनों को समान मात्रा में लेकर पीसकर चूर्ण बनाकर 3 ग्राम की मात्रा में सुबह के समय देशी घी के साथ हृदय के रोग में सेवन करने से रोगी को लाभ होता है।
71. नारियल:
ताजा नारियल का 50 मिलीलीटर रस और उसमे सेंकी हुई हल्दी की गांठ को घिसकर, 20 ग्राम शुद्ध घी में मिलाकर पीने से दिल की बीमारी दूर होती है।
नारियल के पानी को पीने से हृदय को ताकत मिलती है।
72. लौंग:
2-4 पिसी हुई लौंग को ठंडे पानी में पीसकर मिश्री को मिलाकर पीने से दिल की जलन शांत हो जाती है।
सर्दी में हृदय रोग होने पर 21 लौंग, तुलसी के पत्ते 7, कालीमिर्च 5, और 4 बादाम। इन सबको पानी में पीसकर शर्बत बनाकर रख लें। फिर इसमें जरा-सा शहद डालकर पी जाएं। यह शर्बत रोगी के हृदय को शक्ति प्रदान करेगा।
73. पपीता:
पपीते के पत्तों का काढ़ा दिल के रोग में बहुत ही उपयोगी है। इससे घबराहट कम होती है। बुखार, दिल के कमजोर होने और नाड़ी के अधिक तेज होने पर भी पपीते के पत्तों का काढ़ा सेवन करने से नाड़ी की गति कम होती है और बुखार कम होता है।
पपीते के पत्ते को पानी में उबालकर उसके पानी को छानकर पियें। यह हृदय रोग में लाभदायक है।
74. अंगूर:
यदि हृदय में दर्द हो तो मुनक्का की लुगदी 30 ग्राम, शहद 10 ग्राम और लौंग 5 ग्राम आदि को मिलाकर कुछ दिनों तक सेवन करने से दिल के रोग में आराम मिलता है।
रोगी यदि अंगूर खाकर ही रहे तो हृदयरोग शीघ्र ही ठीक हो जाते हैं। जब हृदय में दर्द हो और धड़कन अधिक हो तो अंगूर का रस पीने से दर्द बंद हो जाता है और धड़कन सामान्य हो जाती है। थोड़ी ही देर में रोगी को आराम आ जाता है। तथा रोग की आपात स्थिति दूर हो जाती है।
यदि हृदय में दर्द महसूस हो तो आधा कप अंगूर का रस सेवन करें।
75. सोयाबीन:
सोयाबीन में 20 से 22 प्रतिशत वसा पाई जाती है। सोयाबीन की वसा में 85 प्रतिशत असंतृप्त वसीय अम्ल होते हैं, जो दिल के रोगियों के लिये फायदेमंद है। इसमें श्लेसीथिनश नामक पदार्थ होता है। जो दिल की नलियों के लिये आवश्यक है। यह कोलेस्ट्रांल को दिल की नलियों में जमने से रोकता है।
सोयाबीन खून में कोलेस्ट्रांल की मात्रा को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए यह दिल के रोगियों के लिए फायदेमंद है। ज्यादातर दिल के रोगों में खून में कुछ प्रकार की वसा बढ़ जाती है, जैसे-ट्रायग्लिसरॉइड्स, कोलेस्ट्रॉल और एलडीएल, जबकि फायदेमंद वसा यानी एचडीएल कम हो जाता है। सोयाबीन में वसा की बनावट ऐसी है कि उसमें 15 प्रतिशत संतृप्त वसा, 25 प्रतिशत मोनो संतृप्त वसा और 60 प्रतिशत पॉली असंतृप्त वसा है। खासकर 2 वसा अम्ल, जो सोयाबीन में पाये जाते हैं। यह हृदय के लिए काफी उपयोगी होते हैं। सोयाबीन का प्रोटीन कोलेस्ट्राल एवं एलडीएल कम रखने में सहायक है। साथ ही साथ लाभप्रद कोलेस्ट्रॉल एचडीएल भी बढ़ाता है।
76. इलायची:
इलायची के दाने, पीपरामूल और पटोलपत्र बराबर मात्रा में लेकर यह चूर्ण बनाकर रख लें। इस बने चूर्ण को 1 से 3 ग्राम की मात्रा में शुद्ध घी के साथ चाटने से कफ के कारण उत्पन्न हृदय रोग व हृदय का दर्द दूर हो जाता है।
पीपरामूल और इलायची के दानों को बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बनायें और शहद अथवा गाय के घी के साथ सुबह-शाम सेवन करें। इससे हृदय के रोग दूर रहेंगे।
77. टमाटर: टमाटर के रस में अर्जुन के पेड़ की छाल और चीनी को मिलाकर अवलेह यानी लेप बनाकर खाने से दिल का दर्द और हृदय रोगों में लाभ होता है।
78. एरण्ड: एरण्ड की जड़ का काढ़ा जवाखार के साथ देने से हृदय रोग और कमर दर्द का नाश हो जाता है।
79. बेल:
हृदय (दिल) दर्द में बेल के पत्तों के 1 ग्राम रस में गाय का घी 5 ग्राम शहद के साथ सेवन करने से जल्दी लाभ मिलता है।
बेल के पत्तों का रस 10 मिलीलीटर, देशी घी 5 ग्राम और शहद 10 ग्राम आदि सबको मिलाकर उंगली से चाटने से हृदय की बीमारी में लाभ होता हैं।
80. बैंगन: बैंगन का बराबर सेवन करने से रोगी को दिल की बीमारी नहीं होती है।
81. अरनी : अरनी के पत्ते और धनिये का 60-70 मिलीलीटर काढ़ा पिलाने से हृदय की दुर्बलता मिटती है।
82. अश्वगंधा:
वात के कारण उत्पन्न दिल के रोग में असगंध का चूर्ण 2 ग्राम की मात्रा में गर्म पानी के साथ लेने से लाभ होता है।
असगंध के चूर्ण में बहेड़े का चूर्ण समभाग में मिलाकर 5-10 ग्राम की मात्रा गुड़ के साथ लेने से हृदय सम्बंधी बात पीड़ा दूर होती है।
83. तुलसी: सर्दी के मौसम में तुलसी के 10 पत्ते, 4 कालीमिर्च और 4 बादामों को लेकर ठंडाई की तरह आधा कप पानी में प्रतिदिन घोलकर सेवन करने से विभिन्न प्रकार के हृदय रोग ठीक हो जाते हैं।