Tuesday, 13 September 2016

Don't kill Animal

ईद बकरीद के मौकों पर जानवरों की कुर्बानी दिए जाने को लेकर मेनका गांधी कहां है, चुप क्यों है? क्या ये उन्हीं मुद्दों पर बोलतीं हैं, जिसके लिए इनको अपने आकाओं से अनुमति प्राप्त होती है?
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जिस प्रकार किसानों को नुकसान पहुंचा रहे बंदरों और नील गाय की हत्या के आदेश का पुरजोर विरोध किया था, क्या उसी प्रकार ईद पर 2 करोड़ जानवरों की कुर्बानी देने का विरोध करोगी और कहोगी कि सांकेतिक रुप से सब लोग एक ₹1 इकट्ठा करके एक पशु की कुर्बानी सामूहिक रुप से दे दे?
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भारत की प्रेस्टीट्यूट मीडिया वाले इनमुद्दों पर क्यों चुप है? क्या इसके मालिकों एवं खरीददारों ने ईद-बकरीद के मौकों  पर दिए जाने वाले जानवरों की कुर्बानी पर लिखने एवं बोलने की अनुमति नहीं दी है?
जो महाराष्ट्र में आईपीएल का मैच इसलिए नहीं होने देती कि पानी की कमी है इस प्रेस्टीट्यूट मीडिया को यह भी नहीं पता होता कि जब स्टेडियम बनकर तैयार हो गया है उसमें घास लग गई है तब चाहे मैच हो या ना हो उस में पानी लगातार दिया जाता है आईपीएल के मैचों पर तो भारत की प्रेस्टीट्यूट मीडिया ने रोक लगवा दी थी अब भारत में ईद के अवसर पर 2 करोड़ जानवरों की कुर्बानी दी जाएगी जिनका खून नालियों में बहेगा उसको नालियों में बहने से रोकने के लिए भारत की प्रेस्टीट्यूट मीडिया कब खबरें चलाएगी?
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भारत की प्रेस्टीट्यूट मीडिया वाले क्यों चुप है ? आपसे मेरा अनुरोध है कि आप होली के अवसर पर रंग खेलते समय पानी के दुरुपयोग का मामला उठाते हो, क्या होली के अवसर पर अतिरिक्त पानी कहीं से आता है या हर घर को जितना पानी उपलब्ध होता है हर घर का स्वामी उसी में कटौती करके अपनी होली खेलता है आप हर बार होली पर खबर दिखाते हो, अब भारत में ईद के अवसर पर दो करोड पशुओं की कुर्बानी देकर उनका खून नाली में बहाया जाएगा आप की खबरें कब से शुरू होंगी ?
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शिवरात्रि के अवसर पर खबर चलाते हो कि अगर यह दूध गरीब के बच्चे पी रहे होते तब कितना अच्छा होता, मूर्तियों पर चढ़ाए जाने के बाद यह दूध नाली में बह रहा है, अब आपको बता दूं कि भारत वर्ष में दो करोड़ पशुओं की कुर्बानी दी जाएगी,  आप यह खबर कब चलाएंगे कि इन 2 करोड़ पशुओं को खरीद कर गरीबों के बीच बांट दो और सांस्कृतिक रूप से मिट्टी के पशुओं की बलि दे दो 2 करोड़ पशुओं का खून नाली में बहने से रुक जाएगा और गरीबों को पशु भी मिल जाएंगे दो बूंद दूध से ज्यादा लाभ होगा या पशुओं से ज्यादा लाभ होगा गरीबों को .
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कहां हो प्रेस्टीट्यूट मीडिया वालो?

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