(24.1) भारतीय सेना में सुधार लाने के लिए प्रजा अधीन राजा समूह / राइट टू रिकॉल ग्रुप के प्रस्तावों का सारांश (छोटे में बात )
मैं प्रजा अधीन राजा समूह/राइट टू रिकॉल ग्रुप के सदस्य के रूप में भारतीय सेना में निम्नलिखित परिवर्तनों का प्रस्ताव करता हूँ :-
सेना और नागरिकों के लिए खनिज रॉयल्टी (एम.आर.सी.एम.) : ऐसी प्रक्रियाऐं लागू की जाएं जिनसे सभी खदानों से और भारत सरकार के सभी प्लॉटों से मिलने वाली रॉयल्टियों को इस प्रकार बांटा जाए जिसमें भारतीय सेना को इसका एक तिहाई (1/3) और भारत के नागरिकों को इसका दो तिहाई (2/3) हिस्सा मिले। इससे सेना के वित्तपोषण/आमदनी में वृद्धि होगी।
25 वर्ग मीटर प्रति व्यक्ति से ज्यादा गैर-कृषि भूमि/जमीन पर बाजार मूल्य के 1 प्रतिशत के बराबर सम्पत्ति कर लागू किया जाए और इस निधि/फंड का उपयोग केवल सेना पर किया जाए।
5 एकड़ प्रति व्यक्ति से ज्यादा कृषि भूमि/जमीन पर बाजार मूल्य के 1 प्रतिशत के बराबर सम्पत्ति कर लागू की जाए और इस निधि/फंड का उपयोग केवल सेना पर किया जाए।
25 वर्ग मीटर गैर-कृषि भूमि से अधिक की संपत्ति, 50 वर्ग मीटर से अधिक किया गया भवन-निर्माण,5 एकड़ से अधिक की कृषि संपत्ति और 1 करोड़ से अधिक की अन्य प्रकार की संपत्ति पर 35 प्रतिशत का `विरासत कर` लागू किया जाए। यह कर/टैक्स 65 प्रतिशत होगा जब वह व्यक्ति ‘निकट’ संबंधी नहीं हो।
सिपाहियों/सैनिकों की संख्या 12,00,000 से बढ़ाकर 40,00,000 कर दी जाए।
सैनिकों के वर्तमान (जून, 2010 के) वेतन में 200 प्रतिशत की वृद्धि की जाए जो जनवरी, 2002 से प्रभावी हो।
सर्वजन/सभी के लिए सैनिक प्रशिक्षण : भारत के कक्षा X और उससे ऊपर के सभी नागरिकों के लिए हथियारों के प्रयोग/इस्तेमाल की शिक्षा अनिवार्य रूप से देनी प्रारंभ की जाए। साथ ही, वयस्क लोगों के लिए अस्त्र-शस्त्र/हथियार शिक्षा की कक्षाएं प्रारंभ की जाएं। जैसे-जैसे नागरिकों को हथियार चलाने की ज्यादा से ज्यादा शिक्षा दी जाएगी वैसे-वैसे वे बड़े हथियारों के महत्व के बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त कर पाएंगे और इसलिए वे उन नेताओं का विरोध करेंगे, जो सेना को कमजोर करते हैं।
5,00,000 इंजिनियरों और 10,00,000 मजदूरों/श्रमिकों की भर्ती की जाए ताकि बंदूकों से लेकर टैंकों, हवाई जहाज अथवा परमाणु बम से लेकर मिसाइल/प्रक्षेपास्त्र तक सभी प्रकार के हथियारों के उत्पादन में वृद्धि हो सके। क्योंकि भारतीय सेना को मजबूत बनाना, परमाणु मिसाईल, क्रुज मिसाईल आदि जैसे अमेरिकी-स्तर के हथियारों के निर्माण (निर्माण न कि आयात) की हमारे देश की क्षमता पर निर्भर करेगा।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान(आई.आई.टी) और भारतीय विज्ञान संस्थान(आई.आई.एस.सी) दोनों रक्षा अनुसंधान और विकास विभाग (डी.आर.डी.ओ.) के अंतर्गत आएंगे। 15 वर्षों का प्रतिज्ञा पत्र/बांड उन लोगों पर लागू होगा जो स्नातक कर लेने के बाद इन कॉलेजों मे प्रवेश लेंगे, ऐसे लोगों को रक्षा अनुसंधान और विकास विभाग (डी.आर.डी.ओ.) आदि की सेवा 15 वर्षों तक करनी होगी।
चीन की बराबरी हासिल करने के लिए भारत के परमाणु हथियारों (की संख्या) बढ़ाई जाए। चीन ने 23 जमीनी परमाणु परीक्षण और 22 वायुमंडलीय परीक्षण किए हैं जबकि भारत ने केवल 4 जमीनी परमाणु परीक्षण किए हैं और कोई भी वायुमंडलीय परीक्षण नहीं किया है। और सबसे बड़ा परीक्षण जो चीन ने किया था, वह था – 4500 किलो-टन (का परीक्षण) जबकि हमारे देश का सबसे बड़ा परीक्षण मात्र 45 किलो-टन का ही था। और चीन के पास भारत की तुलना में 20 से 30 गुना से भी ज्यादा परमाणु विस्फोटक शीर्ष(वारहेड्स) हैं। हमें कम से कम दस 3000 किलो-टन का वायुमंडलीय परमाणु परीक्षण और चालीस अन्य जमीनी/वायुमंडलीय परमाणु परीक्षण करना होगा जिसकी क्षमता 100 किलो-टन से लेकर 4500 किलो-टन की हो ताकि भारत चीन के बराबर में आ सके।
कच्चे माल को छोड़कर प्रत्येक/हरेक आयातित वस्तुओं पर 300 प्रतिशत का आयात शुल्क : सेना को हथियार निर्माण कौशल की जरूरत है। आयात किए गए सभी हथियार बेकार होते हैं। और इंजिनियरिंग(अभियांत्रिकी) कौशल बढ़ाने का एकमात्र रास्ता भारत में एक निर्माण सेक्टर का बनाना है जो केवल कच्चे माल का ही आयात करेगा और किसी उच्च तकनीकी वाले समानों का आयात बिलकुल भी नहीं करेगा। पूर्ण स्थानीय उदारीकरण , अमीरों को अपना खुद का उद्योग लगाने के लिए इंजिनियरों को काम पर रखने में सक्षम बनाएगा और 300 प्रतिशत आयात शुल्क लगाने से उन्हें अपना माल स्थानीय स्तर पर बेचने में सक्षम बनाएगा।
श्रमिक/मजदूरों के लिए सामाजिक सुरक्षा और श्रम/मजदूरी (के क्षेत्र में) नौकरी पर आसानी से रखने और निकालने की नीति / पोलिसी (हायर-फायर): इंजिनियरिंग कौशल में सुधार के लिए भारत में बड़ी संख्या में निर्माण करने वाले उद्योगों और (सामान्य) उद्योगों की जरूरत है। और औद्योगिक विकास अधिकतम तब होता है जब मजदूर(श्रमिकों) के लिए सामाजिक सुरक्षा प्रणाली(सिस्टम) होती है और मालिक(नियोक्ता) के पास नौकरी पर रखने और नौकरी से निकालने की पूरी क्षमता होती है। `सेना और नागरिकों के लिए खनिज रॉयल्टी` (एम.आर.सी.एम.) कानून ऐसी सामाजिक सुरक्षा देता है जिससे मालिक(नियोक्ता) के लिए किसी कर्मचारी का शोषण करना असंभव हो जाता है। और नौकरी पर रखने और नौकरी से निकलने संबंधी कानून उत्पादन कम होने पर मालिक(नियोक्ता) को वित्तीय/आर्थिक भार कम करने में समर्थ बनाता है।
संक्षेप में, भारतीय सेना में सुधार करने के लिए हमें सेना में सैनिकों की भर्ती करने, वेतन बढ़ाने आदि जैसे अनेक कदम उठाने की जरूरत पड़ेगी। लेकिन हमें सेना से बाहर और देश के अन्दर भी दसियों/दसों महत्वपूर्ण कदम उठाने की जरूरत पड़ेगी। क्योंकि भारतीय सेना की मजबूती ऐसे अनेक कारकों पर निर्भर करती है जो कारक सेना से बाहर के हैं। उदाहरण के लिए, सेना को ऐसे इंजिनियरों की जरूरत है जो अमेरिकी स्तर के हथियार बना सकें। अभी भारत की आर्थिक नीतियां ऐसी हैं कि ये नीतियां इंजिनियरिंग/निर्माण की प्रतिभाओं को कमजोर बना देती हैं जिससे सेना को नुकसान होता है। इसी प्रकार सेना को बड़ी संख्या में ,समाज से देशभक्त सैनिकों की जरूरत है । लेकिन यदि सरकार में भ्रष्ट मंत्रियों, पुलिसवालों और जजों की भरमार रहेगी तो नागरिकों में देशभक्ति (की भावना) घटेगी और इससे भी सेना कमजोर होती है। इस प्रकार, सेना में सुधार करना तो आसान है लेकिन यह बहुत ही बड़ा काम है क्योंकि सेना में सुधार के लिए कई सिविल/असैनिक विभागों में सुधार करना होगा। कोई भी सेना किसी राष्ट्र की सुरक्षा केवल तभी कर सकती है जब राष्ट्र भी अपनी सेना के उन सभी क्षेत्रों की सुरक्षा करे और मजबूत बनाए जिसकी सेना को जरूरत हो।
(24.2) सेना की ताकत को निश्चित करने वाले प्रमुख कारण / कारक
सैनिकों का वेतन और उनका प्रशिक्षण/ट्रेनिंग महत्वपूर्ण है और उतना ही महत्वपूर्ण है – उनका वेतन, इंजिनियरों और टेक्निशियनों का कौशल स्तर और अनुशासन। और कोई भी व्यक्ति किसी देश में तभी अनुशासित हो सकता है जब वहां का प्रशासन व न्यायालय कम अन्याय करता हो। आइए, मैं इस तथ्य को फिर से तुलनात्मक ढ़ग से बताता हूँ –
वे तत्व जो सेना की ताकत और सुदृढ़ता/ मजबूती पर प्रभाव डालते हैं
ये तत्व सेना की मजबूती पर कैसे प्रभाव डालते हैं?
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सैनिकों का वेतन, प्रशिक्षण
जिस देश में सैनिकों को बेहतर वेतन व प्रशिक्षण मिलेगा वहां की सेना ज्यादा मजबूत होगी और जिस देश में कम वेतन और खराब प्रशिक्षण दिया जाएगा वहां की सेना भी कमजोर होगी।
हथियार के निर्माण/ विनिर्माण की क्षमता
ज्यादा प्रतिभाशाली इंजिनियरों वाले किसी देश में बेहतर हथियार के निर्माण की क्षमता होगी और जिस देश में इंजिनियरों की प्रतिभा कम होगी उस देश में बेहतर हथियार विनिर्माण क्षमता नहीं होगी। इसलिए वे कौन से कारक हैं जो भारत में इंजिनियरिंग प्रतिभा को बढ़ा सकते हैं ?(अध्याय 26 में विस्तार से पड़ें)
आम नागरिकों को हथियार के प्रयोग/चलाने का प्रशिक्षण
जिस देश में आम लोगों के पास जितना ही ज्यादा हथियार होगा उस देश की सेना उतनी ही ज्यादा मजबूत होगी क्योंकि हथियार के प्रयोग का प्रशिक्षण किसी भी व्यक्ति को बड़े हथियारों से परिचित कराता है और इसीलिए नागरिकगण मिलकर ऐसे नेताओं को नकार देते हैं जो अपने विदेशी प्रायोजकों को खुश करने के लिए सेना को कमजोर करते हैं। इसलिए कैसे हम अपने अधिक से अधिक नागरिकों को हथियार देकर शक्तिशाली बना सकते हैं?(पूरी जानकारी के लिए अध्याय 29 देखें)
नागरिकों में अनुशासनहीनता
कोई देश जहां नागरिकों में कम/कमतर अनुशासनहीनता होगी उस देश में सेना ज्यादा मजबूत होगी और जिस देश में नागरिकों में अनुशासनहीनता ज्यादा होगी उस देश में सेना भी कमजोर होगी। इसलिए कौन से कारक/तत्व भारत के नागरिकों में अनुशासनहीनता कम कर सकते हैं?
टैक्स प्रणाली प्रतिगामी(प्रतिगामी = आमदनी बढने पर कर/आय का प्रतिशत घटता है) न होना
जिस देश के टैक्स प्रणाली जितनी कम प्रतिगामी(प्रतिगामी = आमदनी बढने पर कर/आय का प्रतिशत घटता है) होगी उस देश में टैक्स का पैसा उतना ही ज्यादा जमा हो पाएगा और ज्यादा पैसे का उपयोग सेना के लिए किया जा सकेगा और इस प्रकार एक मजबूत सेना बन सकेगी। और जिस देश में प्रतिगामी(प्रतिगामी = आमदनी बढने पर कर/आय का प्रतिशत घटता है) वाली टैक्स प्रणाली होगी उस देश में सेना के लिए पैसा कम होगा और इसलिए उस देश में सेना कमजोर होगी।(अधिक जानकारी के लिए अध्याय 24 देखें)
नारेबाजी
नारेबाजी करना बेकार है और इससे सेना में 1 प्रतिशत का भी सुधार नहीं होता। वास्तव में, नारेबाजी एकदम अनुपयोगी/बेकार है।
देशभक्ति
जिस देश के नागरिक जितने ही देशभक्त होंगे उस देश में सेना उतनी ही मजबूत/सुदृढ़ होगी।
स्वतंत्र अर्थव्यवस्था
परमाणु हथियार विकसित करने के लिए हमें परमाणु हथियार विकसित करने के खिलाफ अमेरिकी आदेश को खत्म करना होगा। और इसके लिए हमें भारत के अन्दर एक ऐसी तकनीक स्थापित करने की जरूरत होगी जो अकेले ही काम कर सके। इसलिए कच्चे माल के अलावा, हमें उन सब (वस्तुओं) का निर्माण करना होगा जिसका निर्माण विश्व के अन्य देश करते हैं।
हटाए जा सकने वाले प्रधान मंत्री
सेना में प्रमुख व्यक्ति प्रधान मंत्री हैं क्योंकि प्रधान मंत्री ही सेना, रक्षा अनुसंधान और विकास विभाग (डी. आर. डी. ओ.) आदि में वेतन तय करते हैं और प्रधान मंत्री ही उन नीतियों को तय करते हैं जो नीतियां उन नागरिक/असैनिक विभागों पर प्रभाव डालती है जिनकी जरूरत सेना को पड़ती है। इसलिए जब तक प्रधान मंत्री को हटाने/बदलने का अधिकार नागरिकों को नहीं होगा तब तक प्रधान मंत्री अमेरिका के हाथों बिक भी सकते हैं और ऐसी नीतियां बना सकते हैं जिससे भारत कमजोर हो। मेरे विचार से, आज हो भी यही रहा है।
इसके अलावा और भी बहुत से कारक हैं। मैने यह चर्चा की है कि कैसे उस सिविल/असैनिक विभाग, जिस पर सेना निर्भर करती है, उसमें सुधार लाया जा सकता है। यह बात मैंने संबंधित सिविल/नागरिक विभागों से संबंधित पाठों में बताया है। उदाहरण के लिए, सेना को देशभक्त नागरिकों की जरूरत है और देश के नागरिकों में देशभक्ति (की भावना) पैदा करने के लिए ऐसे कोर्ट/पुलिस जरूरी हैं जिनमें भ्रष्टाचार न हो। इसलिए मेरे जैसा कोई भी व्यक्ति जो सेना को मजबूत करना चाहता है तो ऐसे कानून लाने की जिम्मेदारी भी उसी व्यक्ति की है जिससे पुलिस और कोर्ट में भ्रष्टाचार कम हो सके। मैंने पहले ही उन कानूनों की सूची उपलब्ध करा दी है जिससे पुलिसवालों/कोर्ट में भ्रष्टाचार कम हो सकेगा।
(24.3) इंजिनियरिंग में प्रतिभा / कुशलता बढ़ाना
एक महत्वपूर्ण कारक, जिससे सेना सुदृढ़/मजबूत होती है, वह है – भारत में इंजिनियरिंग कौशल स्तर। और इसके लिए आर्थिक कानूनों में काफी परिवर्तन की जरूरत होगी। देश में ही कौशल के विकास के लिए, हमें भारत के अन्दर बड़े पैमाने पर उत्पादन/निर्माण की जरूरत पड़ेगी और यह केवल तभी संभव है जब –
कानून यह सुनिश्चित करे कि श्रमिक/मजदूर सुरक्षित हैं
नौकरी पर रखने और नौकरी से निकालने सम्बंधित(हायर-फायर) कानून
उद्योगों में प्रतियोगिता को ज्यादा से ज्यादा बढ़ाने के लिए आसानी से धंधा/कंपनी खोलने और बंद करने संबंधी कानून
उच्च सीमा शुल्क, सीमा शुल्क का एक तिहाई हिस्सा नागरिकों को मिले
उपर्युक्त शर्तें आवश्यक हैं और लगभग पर्याप्त भी। ऊपर बताए गए तीनों कानून निर्माण की क्षमता को बढ़ाने के लिए कैसे जरूरी हैं? और प्रजा अधीन राजा समूह/राइट टू रिकॉल ग्रुप इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कैसे प्रस्ताव करता है? आइए, मैं पहले ‘क्यों और कैसे’ हिस्से का जवाब देता हूँ –
श्रमिक/मजदूर की सुरक्षा : श्रमिक सुरक्षा का अर्थ है कि श्रमिक (सभी नागरिक) के पास परिवार के लिए रोटी, कपड़ा, मकान और शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए न्यूनतम आय की गारंटी तब भी हो जब उसका रोजगार छिन जाए यानि वह कुछ न्यूनतम मजदूरी घर ले जा सके। सुरक्षा के अभाव में मालिक(नियोक्ता) उसका शोषण कर सकता है और उसे ऐसे काम भी करने को कह सकता है जिससे समाज को नुकसान हो। मेरे प्रजा अधीन राजा समूह/राइट टू रिकॉल ग्रुप समूह ने `सेना और नागरिकों के लिए खनिज रॉयल्टी` (एम.आर.सी.एम.) कानून का पस्ताव किया है जिससे नागरिकों को खनिज की रॉयल्टी और जमीन का किराया सीधे ही मिलेगा। यह श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था के समान ही सुरक्षा प्रदान करेगा। हर मालिक(नियोक्ता) को सामाजिक सुरक्षा (प्रदान करने) का भार नहीं उठाना पड़ेगा। कुछ सामाजिक सुरक्षा, मालिक(नियोक्ता) को हुए लाभ में से दिए गए आयकर और संपत्ति कर से आ सकेगी। इस प्रकार, मालिक(नियोक्ता) कुल मिलाकर, श्रमिक सुरक्षा प्रणाली के कुछ अंश के लिए योगदान देंगे।
मजदूर को आसानी से नौकरी पर रखना और आसानी से नौकरी से निकालने सम्बंधित क़ानून (हायर-फायर) : मजदूर को आसानी से नौकरी पररखने और नौकरी से निकालने के कानूनों के अभाव में, अनुशासनहीनता और गैर-जिम्मेदारी बढ़ती जाएगी। और जब मालिक(नियोक्ता) को (व्यापार में) घाटा होता है तो श्रमिकों/मजदूरों को पगार/वेतन देने की मजबूरी उसे अपने उद्योग को बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के हाथों में बेच देने पर बाध्य कर देती है। इससे केवल बहुराष्ट्रीय कम्पनियों और धनवान लोगों की ताकत ही बढ़ती है। दूसरे शब्दों में, यदि हम किसी ऐसे कानून को समर्थन दें जिससे कि कोई मालिक(नियोक्ता) लागत में कटौती करने के नाम पर किसी श्रमिक/मजदूर को नहीं हटा सके तो बहुराष्ट्रीय कम्पनियों और धनवान व्यक्तियों, जिनके पास बैंकों के निदेशकों और वित्त मंत्रियों को घूस देने की क्षमता होती है, वे कम ब्याज पर कर्ज लेकर इस भार को सहन कर लेंगे। लेकिन छोटे-मोटे मालिक(नियोक्ता), जो लगातार प्रतियोगिता के वातावरण में रहते हैं और जिनकी बैंक निदेशकों और वित्त मंत्रियों तक पहूँच नहीं होती कि वे उन्हें घूस दे सकें, तब उनके पास अपनी कम्पनी को बहुराष्ट्रीय कम्पनियों और धनवान व्यक्तियों के हाथों बेच देने के अलावा और कोई चारा/विकल्प नहीं बचेगा। दूसरे शब्दों में, मालिक को नौकरी से निकालने से रोकने वाले कानून केवल धनवान और भ्रष्ट लोगों को ही लाभ होता है।
प्रतियोगिता को अधिकतम (स्तर तक) बढ़ाने के लिए आसानी से धंधा/कंपनी खोलने और बंद करने सम्बंधित कानून: हथियार निर्माण के लिए इंजिनियरिंग कौशल की आवश्यकता होती है। इंजिनियरों में इंजिनियरिंग कौशल के निर्माण का एकमात्र तरीका ऐसी (अनुकूल) परिस्थितियों का निर्माण करना है जिसमें उन्हें अन्य इंजिनियरों के साथ कठोर (अहिंसक) प्रतियोगिता होती है। कालेजों में प्रशिक्षण से उन्हें केवल मुद्दों के बारे में जानकारी मिल पाती है और विश्वविद्यालयों में अनुसंधान से या तो कुछ नई दिशा के काम(पाथब्रेकिंग वर्क) होते हैं या तो उनका समय बरबाद हो जाता है। किसी इंजिनियर को जमीनी कौशल केवल तभी प्राप्त होता है जब वह इंजिनियर वास्तविक उद्योगों में काम करता है और जब उसे वास्तविक प्रतियोगिता का सामना करना पड़ रहा होता है। और (किसी उद्योग में ) आसानी से धंधा/कंपनी शुरू करने और बंद करने सम्बंधित कानून, प्रतियोगिता को अधिकतम बनाने के लिए आवश्यक है।
उच्च सीमा शुल्क : या तो देश को तकनीकी रूप से विश्व के सबसे विकसित देश के बराबर (स्तर पर) रहना होगा या तो उस देश के कानून द्वारा प्राकृतिक कच्चे माल को छोड़कर सभी माल/सामानों पर बहुत अधिक आयात शुल्क लगाना सुनिश्चित करना होगा। चूंकि भारत उस क्षमता को प्राप्त करने से काफी पीछे है जिससे उसकी तुलना कम से कम वियतनाम से की जा सके, चीन अथवा जर्मनी, जापान या अमेरिका की बात तो छोड़ ही दीजिए, इसलिए हमलोगों के लिए यह आवश्यक है कि हम आयात पर 300 प्रतिशत का सीमा शुल्क लगाएं ताकि स्थानीय स्तर पर निर्मित वस्तुओं को स्थानीय बाजार उपलब्ध हो सके। और इस प्रकार जमा की गई सीमा शुल्क का एक तिहाई हिस्सा सीधे नागरिकों को मिलना चाहिए। तस्करी के खिलाफ नागरिकों में घृणा पैदा करने के लिए और यह सुनिश्चित करने के लिए कि नागरिक सीमा शुल्क बोर्ड के अध्यक्ष के विरूद्ध प्रजा अधीन- नागरिक सीमा शुल्क बोर्ड अध्यक्ष (कानून) का प्रयोग अवश्य ही प्रभावी ढ़ंग से कर पाए और यह सुनिश्चित करने के लिए कि सीमा शुल्क का अध्यक्ष सीमा शुल्क का पैसा (सही प्रकार से) उचित तरीके से जमा कर रहा है, सीधा भुगतान महत्वपूर्ण है।
(24.4) क्या होगा यदि हम सेना में सुधार नहीं करते हैं?
यदि हम सेना में सुधार नहीं करते हैं तो भारत इराक के रास्ते पर चल पड़ेगा। अंतरराष्ट्रीय राजनीति दो सामान्य कानूनों पर आधारित है –
मजबूत (बड़ी) मछली कमजोर (छोटी) मछली को चबा (खा) जाएगी। मजबूत सेना वाले देशों के लोग कमजोर सेना वाले देशों के लोगों को लूट लेंगे और गुलाम बना लेंगे। अर्थात यदि भारतीय लोग अपनी सेना में सुधार नहीं करते हैं तो अमेरिकी लोग भारतीयों को लूट लेंगे और गुलाम बना लेंगे।
कोई दया नहीं। कोई छूट नहीं। अमेरिकी लोग भारतीयों के रिश्तेदार नहीं हैं।
अंतर-राष्ट्रिय राजनीतिक परिवर्तन केवल सेना की ताकत में परिवर्तन का ही परिणाम होते हैं और कुछ नहीं। उदाहरण के लिए – वर्ष 1700 में, इंग्लैण्ड की सेना की ताकत बेहतर हथियारों और इंग्लैण्ड के समाज के सुदृढ़/संगठित (न्यायपूर्ण प्रशासन और न्यायपूर्ण कोर्ट के कारण ज्यादा सुदृढ़ता/संगठित थी) होने के कारण भारतीय सेना से 20-25 गुनी मजबूत हो गई थी। और इसलिए, वे भारत को गुलाम बनाने में समर्थ थे। पश्चिमी देशों की सेना द्वितीय विश्व युद्ध के कारण कमजोर हो गई और भारत के सैनिकों को द्वितीय विश्व युद्ध से ताकत मिली जिससे भारत और अनेक एशियाई और अफ्रीकी देश आजाद हो गए। लकिन अब पश्चिमी सेनाओं ने अपनी खोई ताकत फिर से प्राप्त कर ली है और इसलिए इन्होंने पनामा और इराक को निगल (खा) लिया और अब ईरान की बारी है और फिर भारत की बारी आ जाएगी। यदि भारत अपनी सेना मजबूत नहीं करता तो भारत भी इराक के रास्ते चला जाएगा।
आज की स्थिति के अनुसार, अमेरिका के विशिष्ट/ऊंचे लोग अमेरिकी सेना की टूकडियों को विभिन्न देशों जैसे इराक, इरान और फिर भारत (का नम्बर आएगा) में दो मुख्य कारणों से भेज रहे हैं। पहला खनिज पदार्थ/अयस्क के सभी खदानों को हड़पने के लिए और दूसरा इसाई धर्म को फैलाने के लिए। भारत को “(धर्म परिवर्तन की जा सकने वाली) एक करोड़ आत्मा रूपी फसल की कटाई वाले राष्ट्र” के रूप में देखा जाता है और अमेरिका के ईसाई धर्म के कट्टरपंथी लोग भारत से हिन्दुत्व, सिख, बौद्ध आदि धर्मों को मिटाना चाहते हैं और ईसाई धर्म को मुख्य धर्म के रूप में लाना चाहते हैं। इसी प्रकार का एक सपना इस्लाम धर्मवाले कट्टरपंथी, सऊदी अरब और पाकिस्तान में देखते हैं – वे सम्पूर्ण भारत में इस्लाम स्थापित करना चाहते हैं। लेकिन इस्लामिक लोग कट्टरपंथी वास्तविक/बड़े खतरे नहीं हैं क्योंकि वे स्वयं ही अमेरिकी सेना के अधीन हैं। हमें चीन के भी खतरे का सामना करना पड़ता है जो भारत को नष्ट करना चाहता है ताकि वह विश्व निर्यात में बेहतर हिस्सेदारी पा सके और अरूणाचल प्रदेश के साथ-साथ असम के कच्चे तेल के कुओं को हथिया सके।
पाकिस्तान अपने आप में/खुद ही बहुत कमजोर है लेकिन पाकिस्तानी विशिष्ट/उच्चवर्गीय लोग पाकिस्तानी सेना और पूरे पाकिस्तान को पश्चिमी देशों, अरब या चीन, इनमें से जो भी सबसे ऊंची बोली लगाएगा, उसका खिलौना बनाने को तैयार हैं जबकि अमेरिका अथवा चीन भारत को तोड़ने के लिए अपने सैनिकों का सीधे तौर पर इस्तेमाल नहीं करना चाहेंगे लेकिन वे हथियार और सेटेलाईट से प्राप्त सूचना प्रदान करके पाकिस्तान का उपयोग भारत को तोड़ने के लिए कर सकते हैं।